चारित्रिक एवं नैतिक मूल्यों पर आधारित पाठ्यक्रम रहेगा ।
१- ब्रह्मचर्य जीवन शैली के आधार पर नियमित दैनिक दिनचर्या
२- माता – पिता व गुरु आदि की सेवा व आज्ञा पालन ।
३- अभिवादन
४- खान – पान
५ – स्वच्छता
६ – अनुशासन
७- देश भक्ति
८- आर्य समाज
९- पांच महायज्ञ का अनुष्ठान
१०- प्राथमिक चिकित्सा
शिविर
वर्ष में कम से कम दो शिविर या अधिक के माध्यम से युवक – युवतियों का शारीरिक, सामाजिक, बौद्धिक और आत्मिक विकास करना । यह शिविर प्रणाली चार स्तर की होगी ।
प्रथम वर्ष – आर्य वीर वर्ष
द्वितीय वर्ष – शाखा नायक
तृतीय वर्ष – उप व्यायाम शिक्षक
चतुर्थ वर्ष - व्यायाम शिक्षक
यह संस्था अपनी सेवाओं के माध्यम से विविध उत्सवों की सांस्कृतिक रक्षा हेतु विभिन्न अवसरों पर उपयुक्त कार्यक्रमों के द्वारा आम जनता को जागरुक करती है ।
जैसे - गौपालन ,नारी रक्षा, नैतिक उत्थान ,राष्ट्र सेवा , राष्ट्र भक्ति आदि ।